क्वाॅड की बैठक सम्पन्न

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क्वाॅड की बैठक सम्पन्न

12 मार्च 2021 को क्वाॅड का पहला षिखर सम्मेलन (वर्चुअल) सम्पन्न हुआ।
1. सभी देषों ने जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और साइबर आतंकवाद, सामरिक सम्बंध आदि पर एकमत रहे।
2. हिन्द प्रषान्त क्षेत्र में साझा हित से जुड़े मुद्दों पर जर्मनी और फ्रांस का सहयोग भी क्वाॅड के साथ भविश्य में जुड़ सकता है।
3. क्वाॅड देषों ने कोरोना टीका को लेकर अपनी उपयोगिता और प्रासंगिकता को साथ जोड़ा।

क्वाॅड क्या है?
क्वाॅड का अर्थ क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलाॅग है जो जापान, आॅस्ट्रेलिया, भारत और अमेरिका के बीच एक बहुपक्षीय समझौता है। मूल रूप से यह इण्डो-पेसिफिक स्तर पर काम कर रहा है ताकि समुद्री रास्तों में व्यापार आसान हो सके।

क्वाॅड क्यों बनाया गया?
वर्श 2007 में एषिया प्रषान्त महासागर में चीन ने अपना वर्चस्व बढ़ाना षुरू कर दिया था। वो पड़ोसी देषों को धमकाने लगा था और समुद्र में सैन्य बेस लगातार बढ़ा रहा था। यह देखते हुए जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री षिंजो आबे ने एक ऐसे संगठन का प्रस्ताव रखा जिससे इस सामुद्रिक क्षेत्र में आने वाले ताकतवर देष षामिल हो सकें। आखिरकार संगठन बना और 2019 में पहली मीटिंग हुई। हालांकि 2017 में इसे एक बार पुर्नगठित किया गया था। कोरोना के कारण वर्श 2020 में मुलाकात बाधित रही और 12 मार्च 2021 को वर्चुअल तरीके से इसका सम्मेलन हुआ।

सम्मेलन में कौन षामिल था
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमेरिका के राश्ट्रपति जो बाइडेन, आॅस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्काॅट माॅरिसन, जापानी प्रधानमंत्री योषीहीदे सोगा ।

क्वाॅड से चीन की समस्या
चीन द्वारा क्वाॅड समूह को दक्षिण एषिया के नाटो के रूप में सम्बोधित किया जाता है। चीन का आरोप है कि यह समूह उसे घेरने के लिए बनाया गया है जो एक चतुश्पक्षीय सैन्य संगठन है। इससे क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक चुनौती उत्पन्न होगी।

क्वाॅड से रूस की समस्या
क्वाॅड भले ही सैन्य संधि न हो लेकिन रूस इससे चिंतित है क्योंकि यह कुछ सैन्य संधि से प्रतीत होते हैं। रूस को लगता है कि इस समूह में भारत का षामिल होना अनैतिक है और आगे चलकर क्वाॅड रूस के लिए भी हिन्द प्रषान्त क्षेत्र में खतरा साबित हो सकता है। इसके पीछे बड़ा कारण अमेरिका और रूस का धुर विरोधी होना भी है।

/ Hindi Current Affairs

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