मुख्य परीक्षा हेतु लेखन विधा

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मुख्य परीक्षा हेतु लेखन विधा

 उत्तर लेखन एक सरल अभ्यास
 हमारा अनुभव
सिविल सेवा एवं राज्य सिविल सेवा परीक्षा के प्रतियोगियों को अध्यापन कराने का 17 वर्ष पुराना अनुभव इस मनोविज्ञान को मजबूत करने में सहायक रहा है कि इस परीक्षा से जुड़े सघन बिन्दुओं में एक समुचित बिन्दु मुख्यतः हिन्दी माध्यम के अभ्यर्थियों में उत्कृष्ट लेखन शैली का न होना रहा है। हालांकि उत्कृष्ट बहुत भारी शब्द है इसको श्रेष्ठ व समुचित तक ही सीमित मान लिया जाय तो भी अंक में बढ़त ली जा सकती है।
जो परिवर्तन हुआ है
मुख्य परीक्षा कई परिवर्तनों से गुजर रही है। उत्तर प्रदेश पीसीएस मुख्य परीक्षा भी बदलाव के साथ आयोजित हो रही है। तीन घण्टे में 20 प्रश्न लिखने का अभ्यास स्वयं में एक चुनौती है। यूपीपीसीएस में 10 प्रश्न 125 शब्दों में और बाकी 10 प्रश्न 250 शब्दों में उत्तर की मांग कर रहे हैं। विदित हो कि अच्छे अंक के लिए न केवल स्तरीय ज्ञान की आवश्यकता है बल्कि विश्लेषणात्मक विचारशीलता के साथ बोधगम्यता तत्पश्चात् प्रस्तुति इसके मूल में है।
दो शब्द आपके लिए
निर्धारित मापदण्डों में जीवित सवाल यह है कि क्या अभ्यर्थियों के लिए संक्षिप्त एवं स्पष्ट रूप में शब्दों की सीमाओं केा ध्यान में रखते हुए उत्तर लेखन कर पाना सरल काज है। सम्भव है कि जुबानी तौर पर इसका उत्तर हां में होगा पर शैलीगत् तरीके से उत्तर लेखन कठिन तो नहीं पर सरल भी नहीं है। यह एक सरल अभ्यास है जिसे निरंतरता देने से न केवल प्रस्तुति उत्कृष्ट होती है बल्कि सफलता भी सुनिश्चित होती है।
हमें आपसे कुछ कहना है:
यह कहना हमारा कत्र्तव्य है कि आप प्रश्नों का समाधान उत्तर के तौर पर तभी कर पाने में पूरी तरह सफल करार दिये जायेंगे जब आप लेखन कौशल को परिष्कृत और परिमार्जित करने का काम करेंगे। एक सटीक उत्तर क्या होता है, वह किस प्रकार परीक्षक को प्रभावी कर सकता है और कैसे इसे लिखा जा सकता है साथ ही उत्तर के साथ समय का अनुपात भी कैसे समुचित हो पाये आदि को समझने के लिए निम्न बिन्दुओं पर दृष्टि डालें:
1. प्रश्न का उत्तर लिखना कार्य नहीं समस्या समझे।
2. प्रश्न में निहित तथ्यों को उभारें और विश्लेषित करें।
3. प्रश्न कितने उपभागों में है इसकी समझ भी तुरंत विकसित कर लें।
4. प्रश्न क्या कह रहा है मसलन गणना करें, चिन्ह्ति करें, चर्चा करें, स्पष्ट करें, जांच करें, वर्णन करें, मूल्यांकन करें आदि को समझते हुए इसकी प्रकृति और स्थिति के साथ उत्तर को लिखें।
5. सटीक उत्तर वो होता है जो अतिरिक्त बोझ से दबा नहीं होता।
6. अतिरिक्त दर्शन और बोध भी उत्तर को प्रश्न के सम्बोधन से दूर ले जाते हैं।
7. सटीक उत्तर पढ़ने में अत्यंत सहज होगा और शीघ्र ही परीक्षक को समझने में सहायक होता है।
8. उत्तर लेखन एक कला है परन्तु वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य से युक्त है।
9. कई उत्तर में भूमिका की आवश्यकता नहीं है। आप इससे बचें।
10. कई उत्तर में निष्कर्ष की आवश्यकता नहीं। आप इससे बचें।
11. प्रत्येक प्रश्न का एक अलग विश्लेषण होता है। विषयवस्तु का पक्ष भी है और विपक्ष भी।
12. प्रस्तुति का तरीका बिन्दुवार भी हो सकता है और पैरा रूप में भी, दोनों का मिश्रण भी कर सकते हैं।
13. व्यवस्थित और क्रमिक उत्तर वैज्ञानिक प(ति से ओतप्रोत माने जाते हैं। इसका लेखन में अतिरिक्त महत्व है।
14. समय तब बचता है जब समाधान की दिशा पता होती है। समाधान क्या करना है ये प्रश्न की समझ पर निर्भर है और प्रश्न की समझ बार-बार अभ्यास पर आधारित है।
15. विषय-विशेष के प्रति आवश्यक ज्ञान व विचारशील अवधारणा प्रश्न विश्लेषण की शक्ति को बढ़ाता है जबकि बार-बार लेखन अभ्यास, उचित शब्द, समुचित वाक्य विन्यास, सटीक उत्तर की कला विकसित करता है। सम्भव है शब्द सीमा की भी परख बार-बार के अभ्यास से हो जाती है और अपेक्षानुरूप अंक भी प्राप्त हो जाते हैं।
एक अच्छा उत्तर
कई पहलुओं पर आधारित यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें विषय वस्तु का विश्लेषण और सटीक प्रस्तुति का समागम सुनिश्चित करना होता है। विश्लेषण और प्रस्तुति लेखन के दो उपबन्ध है जिसे निम्न संदर्भों में समझा जा सकता है।
विषयवस्तु का विश्लेषण
एक अच्छा उत्तर लेखन प्रश्न की सारगर्भिता और उसके सम्बोधन से सम्बंधित होता है। कहने का तात्पर्य यह देखना कि क्या आपका उत्तर पूछ गये प्रश्न को सम्बोधित कर रहा है। प्रश्न को ठीक से कैसे समझें, उसकी आवाज को कैसे दिशा दें और विश्लेषणात्मक पहल का सीमांकन कितना रखें। इन सभी पहलुओं पर ध्यान देना ही पड़ता है।
कई प्रतियोगी शब्द सीमा के भीतर उत्तर को बाखूबी प्रस्तुत कर देते हैं परन्तु यदि उसका सम्बोधन प्रश्न से पूरी तरह संलग्न नहीं होता तो लेखन अंक प्रदायी सि( नहीं होता। सम्भव है अंक गुणात्मक न होकर कुछ मात्रा में ही सिमट कर रह जाते हैं।
विश्लेषण के अंतर्गत ही कई महत्वपूर्ण बातें भी समझें:
1. क्या उत्तर में भूमिका की किसी प्रकार की आवश्यकता है?
2. क्या उत्तर लेखन में निष्कर्ष की आवश्यकता है?
3. क्या विश्लेषण करते समय सभी प्रश्नों के भाग एवं उपभाग उत्तर लेखन में समाहित हैं।
 विषयवस्तु की प्रस्तुति कैसे?
समुचित प्रस्तुति हेतु उचित विश्लेषण की अतिरिक्त आवश्यकता होती है। प्रश्न की प्रकृति, विशेषता एवं महत्व व अन्य जो प्रश्न में निहित है आदि को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुति की उपादेयता को भी सारगर्भित करना होता है। मुख्य परीक्षा का उत्तर लिखते समय शब्द सीमा का विशेष ध्यान, वाक्य विन्यास, स्पष्ट एवं सरल भाषा से युक्त होना चाहिए। प्रस्तुति का विश्लेषण ही यह सुनिश्चित करता है कि निम्न प्रसंग उत्तर लेखन के समय विश्लेषित कर देना चाहिए।
1. उत्तर बिन्दुवार लिखना है या पैराग्राफ में।
2. उत्तर के कुछ भाग को रेखांकित करने की आवश्यकता तो नहीं है।
3. काॅपी में जगह सीमित है लिखते समय इसका आंकलन करके रखना चाहिए।
4. उत्तर प्रस्तुति में शब्द सीमा का पालन अनिवार्य रूप से करना चाहिए। इससे अंक में अधिकता और समय में बचत होती है।

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