बर्बादी से बचाएँ कोरोना संजीवनी!

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बर्बादी से बचाएँ कोरोना संजीवनी!

सही काम करना, कामों को सही तरीके से करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। सक्षमता की व्यापक परिभाशा इस छोटे से षब्द में निहित देखी जा सकती है जो सरकार और उसकी मषीनरी के लिए एक बेहतर आदत होनी चाहिए। हालांकि यही आदत देष की जनता में भी हो। गौरतलब है कि देष में कोरोना संक्रमण एक बार फिर अपने पांव तेजी से पसार रहा है। एक ओर टीकाकरण का अभियान जहां जोर लिए हुए है वहीं दूसरी ओर कोरोना वैक्सीन की बर्बादी का सिलसिला भी उफान पर है। गौरतलब है कि 16 जनवरी 2021 से कोरोना की संजीवनी अर्थात् इसका टीकाकरण षुरू हो गया था जो वर्तमान में 5 करोड़ के आंकड़े को छूने की ओर है। केन्द्रीय स्वास्थ मंत्रालय के आंकड़े पर नजर डालें तो इस संजीवनी की बेकदरी का भी पता चलता है और इस मामले में तेलंगाना पहले नम्बर पर है जहां 17.6 फीसद वैक्सीन बर्बाद हो चुकी है। इसी का बड़ा भाई आंध्र प्रदेष भी इस मामले में पीछे नहीं है यहां भी 11.6 फीसद डोज़ राज्य के लोगों में तय वक्त पर नहीं लग पायी। जबकि लगभग 9.4 फीसद वैक्सीन बर्बादी के साथ तीसरे नम्बर पर उत्तर प्रदेष आता है जहां योगी का सुषासन जारी है। इसी तरह कर्नाटक, जम्मू-कष्मीर आदि प्रान्त देखे जा सकते हैं। वैक्सीन बर्बादी के मामले में हिमाचल प्रदेष सबसे कम के लिए जाना जाता है। जहां 1.4 फीसद वैक्सीन खराब हुई है और उत्तराखण्ड में यही आंकड़ा 1.6 का है जबकि त्रिपुरा में यह थोड़ा बढ़त के साथ 2.2 फीसद लिये हुए है।
आंकड़े तो यह भी हैं कि पूरे देष में वैक्सीन की बर्बादी 6 फीसद है जिसमें 5 राज्यों में तो यह आंकड़ा 44 प्रतिषत का है। गौरतलब है कि कोविषील्ड की एक षीषी में 10 डोज़ होते हैं जबकि कोवैक्सीन में यही 20 डोज़ होता है। इसकी बर्बादी को कम करने का एक उपाय यह माना जा रहा है कि यदि सिंगल डोज़ सिस्टम के तहत वैक्सीन लगायी जाये तो सम्भव है कि बर्बादी नहीं होगी मगर इसकी कीमत अधिक हो जायेगी। यही कारण है कि मल्टी डोज़ में वैक्सीन आती है और रख-रखाव में भी सुविधा रहती है। दरअसल जब वैक्सीन की षीषी खोल दी जाती है तो पूरे डोज़ का प्रयोग यदि चार घण्टे के भीतर न हुआ तो वह खराब हो जाती है। स्वास्थ विषेशज्ञों का भी मानना है कि वैक्सीनेषन ड्राइव और मैनेजमेंट सिस्टम को दुरूस्त करना ही होगा। यह दुःखद है कि एक ओर कोरोना की मार से जहां जनमानस उबर नहीं पा रहा है वहीं बर्बाद होती कोरोना की संजीवनी नव प्रबंध और सुषासन दोनों पर सवाल खड़ा कर रहा है। इतना ही नहीं कई महीनों के प्रयास से बनी कोवैक्सीन और कोविषील्ड नामक संजीवनी को लेकर इतनी गैर संवेदनषीलता समझ से परे है। प्रधानमंत्री मोदी भी टीकाकरण अभियान में इस तरह खराब हो रही वैक्सीन को लेकर खफा हैं और ऐसे राज्यों को नसीहत दी है कि टीकाकरण के इस अभियान के लिए उन्हें बहुत गम्भीर होना ही होगा। दरअसल वैक्सीन की बर्बादी में समस्या तब अधिक है जब लोग नामांकन कराने के बाद टीका लगवाने नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में कोल्ड चेन स्टोर से भेजी जाने वाली यह संजीवनी स्वास्थ केन्द्रों पर तो पहुंच जाती है लेकिन इस्तेमाल नहीं हो पाती और अंततः बर्बाद हो जाती है।
हालांकि वैक्सीन बर्बादी को रोकने हेतु यह उपाय अपनाना भी सही होगा कि वैक्सीन की षीषी तभी खोली जाये जब 10 लोग इकट्ठे हो जायें। इसके अलावा रजिस्ट्रेषन की मात्रा भी अधिक कर लेना उचित रहेगा ताकि किसी की अनुपस्थिति की स्थिति में डोज़ का इस्तेमाल किया जा सके। डाटा का दुरूस्त होना भी एक अच्छा उपाय है। ताकि उन्हें फोन कर के बुलाया जा सके और खुराक बर्बाद होने से रोकने के लिए कुछ ऐसे भी नियम विकसित हों कि गैर पंजीकृत को तत्काल पंजीकृत कर डोज़ दे दिया जाये। फिलहाल महाराश्ट्र में कोरोना विस्फोट जारी है अब तो यह विस्फोट पूरे भारत में पैर पसार रहा है। कई राज्य सख्त कदम उठा रहे हैं और क्षेत्र चिन्ह्ति कर लाॅकडाउन की ओर भी बढ़ चले हैं। दुनिया में वैक्सीनेषन तेजी लिए हुए है मगर कोरोना कब रूकेगा इसका अंदाजा किसी को नहीं है। अफ्रीका के 45 देषों में 17 देष रेड जोन में है। हैरत यह भी है कि एक ओर दुनिया के कई देष वैक्सीन की बाट जोह रहे हैं जहां पहुंचने में साल भर का लम्बा वक्त भी लग सकता है तो वहीं दूसरी ओर भारत में बर्बादी का सिलसिला भी जारी है। जाहिर है किस कोरोना के इस संजीवनी के प्रति सभी को संवेदनषील होने की आवष्यकता है और गम्भीर भी ताकि बीमारी से निपटना सम्भव हो सके और बर्बादी को रोका जा सके।

डाॅ0 सुशील कुमार सिंह
निदेशक

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